विज्ञान और भगवान

विज्ञान और भगवान


तेरी मर्जी के बिना हे प्रभु मंगल मूल।
 पत्ता तक हिलता नहीं खिले ना एक भी फूल।।

यह संपूर्ण विश्व तथा इसमें  रहने वाले  जीव जंतु  यह सब जब हम देखते हैं  तो हमारे मन में एक विचार उठता है कि आखिर यह  सब कैसे मुमकिन है? समय पर दिन और रात का होना  तथा समय पर मौसम परिवर्तन तथा अन्य भौतिक घटनाएं होती है जिनको हम देखते हैं तो हमें ऐसा लगता है कि यह सब क्यों हो रहा है  लेकिन वैज्ञानिकों ने तो इसकी खोज रखी है क्या यह सब चलाने वाला व इस सब को नियंत्रित करने वाला कोई एक  दैविक शक्ति है या विज्ञान ही है  तो हमने पाया  की विज्ञान कुछ ही वर्ष पहले  उद्गमित  हुई है  लेकिन  वेदों में  तथा परमात्मा की चर्चा में यह सारी बातें बहुत पहले से विद्यमान है स्पष्ट होता है कि भगवान  का अस्तित्व भी मौजूद है  और वही संपूर्ण ब्रह्मांडो को  चलाता है और  जो नास्तिक लोग होते हैं वे समझते हैं कि विज्ञान बड़ा है लेकिन  विज्ञान  एक सीमित स्थिति में है  और  परमात्मा तथा दैविक शक्ति  जिसकी ना तो कोई  सीमा है और ना ही  उसकी अपरंपार  सृष्टि की किसी को जानकारी है अगर विज्ञान ही सब कुछ है तो आखिरकार किसी भयानक बीमारी को देख कर डॉक्टर भी क्यों कह देते हैं कि मरीज हमारे अब में कुछ नहीं है अब तो भगवान ही इसकी मदद कर सकते हैं?
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